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उत्पत्ति 6
नूह का जहाज

छठा अध्याय उपद्रव से भरी पृथ्वी और बुराई की ओर झुकी मानवजाति का वर्णन करता है, यहाँ तक कि परमेश्वर उसे जल-प्रलय से नष्ट करने का निश्चय करता है। परन्तु धर्मी नूह पर यहोवा के अनुग्रह की दृष्टि बनी रही। परमेश्वर उसे अपने परिवार और पशुओं को बचाने के लिए जहाज का ठीक-ठीक नक्शा देता है, और नूह सब कुछ आज्ञा के अनुसार करता है।

पाठ: इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी, © 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0। शीर्षक, परिचय और चित्र: Imago Biblia।

पद 1–4

दानव

फिर जब मनुष्य भूमि के ऊपर बहुत बढ़ने लगे, और उनके बेटियाँ उत्पन्न हुईं,

तब परमेश्वर के पुत्रों ने मनुष्य की पुत्रियों को देखा, कि वे सुन्दर हैं; और उन्होंने जिस-जिसको चाहा उनसे ब्याह कर लिया।

तब यहोवा ने कहा, “मेरा आत्मा मनुष्य में सदा के लिए निवास न करेगा, क्योंकि मनुष्य भी शरीर ही है; उसकी आयु एक सौ बीस वर्ष की होगी।”

उन दिनों में पृथ्वी पर दानव रहते थे; और इसके पश्चात् जब परमेश्वर के पुत्र मनुष्य की पुत्रियों के पास गए तब उनके द्वारा जो सन्तान उत्पन्न हुए, वे पुत्र शूरवीर होते थे, जिनकी कीर्ति प्राचीनकाल से प्रचलित है।

एक प्राचीन नगर की भीड़ भरी गली में गहरे वस्त्र पहने और भाले लिए तीन विशालकाय पुरुष भीड़ के बीच से गुजरते हैं, जो डरकर हट जाती है।

पद 5–8

नूह पर अनुग्रह

यहोवा ने देखा कि मनुष्यों की बुराई पृथ्वी पर बढ़ गई है, और उनके मन के विचार में जो कुछ उत्पन्न होता है वह निरन्तर बुरा ही होता है। (भज. 53:2)

और यहोवा पृथ्वी पर मनुष्य को बनाने से पछताया, और वह मन में अति खेदित हुआ।

तब यहोवा ने कहा, “मैं मनुष्य को जिसकी मैंने सृष्टि की है पृथ्वी के ऊपर से मिटा दूँगा; क्या मनुष्य, क्या पशु, क्या रेंगनेवाले जन्तु, क्या आकाश के पक्षी, सब को मिटा दूँगा, क्योंकि मैं उनके बनाने से पछताता हूँ।”

परन्तु यहोवा के अनुग्रह की दृष्टि नूह पर बनी रही।

भारी आकाश के नीचे एक बड़ा अँधेरा नगर; अलग एक पहाड़ी पर प्रकाश की किरण केवल नूह के घर को रोशन करती है।

पद 9–13

नूह परमेश्वर के साथ चलता था

नूह की वंशावली यह है। नूह धर्मी पुरुष और अपने समय के लोगों में खरा था; और नूह परमेश्वर ही के साथ-साथ चलता रहा।

और नूह से शेम, और हाम, और येपेत नामक, तीन पुत्र उत्पन्न हुए।

उस समय पृथ्वी परमेश्वर की दृष्टि में बिगड़ गई थी, और उपद्रव से भर गई थी।

और परमेश्वर ने पृथ्वी पर जो दृष्टि की तो क्या देखा कि वह बिगड़ी हुई है; क्योंकि सब प्राणियों ने पृथ्वी पर अपना-अपना चाल-चलन बिगाड़ लिया था।

तब परमेश्वर ने नूह से कहा, “सब प्राणियों के अन्त करने का प्रश्न मेरे सामने आ गया है; क्योंकि उनके कारण पृथ्वी उपद्रव से भर गई है, इसलिए मैं उनको पृथ्वी समेत नाश कर डालूँगा।

रात को तारों के नीचे नूह अकेला एक पहाड़ी पर खड़ा है, हथेलियाँ खुली, हवा उसके लबादे में; नीचे नगर की बेचैन रोशनियाँ।

पद 14–16

जहाज का नक्शा

इसलिए तू गोपेर वृक्ष की लकड़ी का एक जहाज बना ले, उसमें कोठरियाँ बनाना, और भीतर-बाहर उस पर राल लगाना।

इस ढंग से तू उसको बनाना: जहाज की लम्बाई तीन सौ हाथ, चौड़ाई पचास हाथ, और ऊँचाई तीस हाथ की हो।

जहाज में एक खिड़की बनाना, और उसके एक हाथ ऊपर से उसकी छत बनाना, और जहाज की एक ओर एक द्वार रखना, और जहाज में पहला, दूसरा, तीसरा खण्ड बनाना।

जहाज का कटा हुआ चित्र: लकड़ी का एक विशाल आयताकार सन्दूक, कोठरियों में बँटे तीन खण्ड, बगल में द्वार और छत के नीचे खिड़की। लम्बाई: 300 हाथ (≈ 135 मी) ऊँचाई: 30 हाथ (≈ 13 मी) चौड़ाई: 50 हाथ (≈ 22 मी) खिड़की (पद 16) एक ओर द्वार (पद 16) कोठरियाँ (पद 14) तीन खण्ड (पद 16) राल से लेपा हुआ (पद 14)

पद 17–21

वाचा

और सुन, मैं आप पृथ्वी पर जल-प्रलय करके सब प्राणियों को, जिनमें जीवन का श्वास है, आकाश के नीचे से नाश करने पर हूँ; और सब जो पृथ्वी पर हैं मर जाएँगे।

परन्तु तेरे संग मैं वाचा बाँधता हूँ; इसलिए तू अपने पुत्रों, स्त्री, और बहुओं समेत जहाज में प्रवेश करना।

और सब जीवित प्राणियों में से, तू एक-एक जाति के दो-दो, अर्थात् एक नर और एक मादा जहाज में ले जाकर, अपने साथ जीवित रखना।

एक-एक जाति के पक्षी, और एक-एक जाति के पशु, और एक-एक जाति के भूमि पर रेंगनेवाले, सब में से दो-दो तेरे पास आएँगे, कि तू उनको जीवित रखे।

और भाँति-भाँति का भोजन पदार्थ जो खाया जाता है, उनको तू लेकर अपने पास इकट्ठा कर रखना; जो तेरे और उनके भोजन के लिये होगा।”

जहाज के सामने नूह का परिवार ढलान पर रसद चढ़ाता है; दूर पशु जोड़े-जोड़े आते हैं।

पद 22

“नूह ने वैसा ही किया”

परमेश्वर की इस आज्ञा के अनुसार नूह ने किया।

नूह और उसके पुत्र जहाज बनाते हैं: एक शहतीर ढोता है, दूसरा खूँटियाँ ठोकता है, तीसरा ढाँचे पर राल लगाता है।