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उत्पत्ति 15
अब्राम के साथ वाचा

पंद्रहवाँ अध्याय यहोवा और अब्राम के बीच का संवाद है, जिसकी अब तक कोई सन्तान नहीं है। परमेश्वर उसे तारों के समान अनगिनत वंश की प्रतिज्ञा देता है, और अब्राम विश्वास करता है। फिर एक प्राचीन विधि के द्वारा यहोवा उसके साथ वाचा बाँधता है और उसे देश देता है।

पाठ: इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी, © 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0। शीर्षक, परिचय और चित्र: Imago Biblia।

पद 1

“मैं तेरी ढाल हूँ”

इन बातों के पश्चात् यहोवा का यह वचन दर्शन में अब्राम के पास पहुँचा “हे अब्राम, मत डर; मैं तेरी ढाल और तेरा अत्यन्त बड़ा प्रतिफल हूँ।”

अपने तम्बू में अब्राम छाती पर हाथ रखे बिछौने पर उठ बैठता है, जबकि द्वार से तेज़ सुनहरा प्रकाश भीतर आ रहा है।

पद 2–6

“तारागण को गिन”

अब्राम ने कहा, “हे प्रभु यहोवा, मैं तो सन्तानहीन हूँ, और मेरे घर का वारिस यह दमिश्कवासी एलीएजेर होगा, अतः तू मुझे क्या देगा?”

और अब्राम ने कहा, “मुझे तो तूने वंश नहीं दिया, और क्या देखता हूँ, कि मेरे घर में उत्पन्न हुआ एक जन मेरा वारिस होगा।”

तब यहोवा का यह वचन उसके पास पहुँचा, “यह तेरा वारिस न होगा, तेरा जो निज पुत्र होगा, वही तेरा वारिस होगा।”

और उसने उसको बाहर ले जाकर कहा, “आकाश की ओर दृष्टि करके तारागण को गिन, क्या तू उनको गिन सकता है?” फिर उसने उससे कहा, “तेरा वंश ऐसा ही होगा।” (रोम. 4:18)

उसने यहोवा पर विश्वास किया; और यहोवा ने इस बात को उसके लेखे में धार्मिकता गिना। (रोम. 4:3)

आकाशगंगा से भरे विशाल तारों भरे आकाश के नीचे अब्राम, अपने तम्बू के पास पीछे से दिखाई देता हुआ, तारों की ओर हाथ उठाता है।

पद 7–11

बीच से चीरे गए पशु

और उसने उससे कहा, “मैं वही यहोवा हूँ जो तुझे कसदियों के ऊर नगर से बाहर ले आया, कि तुझको इस देश का अधिकार दूँ।”

उसने कहा, “हे प्रभु यहोवा मैं कैसे जानूँ कि मैं इसका अधिकारी होऊँगा?”

यहोवा ने उससे कहा, “मेरे लिये तीन वर्ष की एक बछिया, और तीन वर्ष की एक बकरी, और तीन वर्ष का एक मेढ़ा, और एक पिण्डुक और कबूतर का एक बच्चा ले।”

और इन सभी को लेकर, उसने बीच से दो टुकड़े कर दिया और टुकड़ों को आमने-सामने रखा पर चिड़ियों के उसने टुकड़े नहीं किए।

जब माँसाहारी पक्षी लोथों पर झपटे, तब अब्राम ने उन्हें उड़ा दिया।

सूर्यास्त के समय पत्थरों की दो पंक्तियों के बीच कपड़ों से ढकी भेंटें और दो कबूतर रखे हैं; अब्राम झपटते हुए शिकारी पक्षियों को भगाने के लिये अपनी लाठी उठाता है।

पद 12–16

भारी नींद

जब सूर्य अस्त होने लगा, तब अब्राम को भारी नींद आई; और देखो, अत्यन्त भय और महा अंधकार ने उसे छा लिया।

तब यहोवा ने अब्राम से कहा, “यह निश्चय जान कि तेरे वंश पराए देश में परदेशी होकर रहेंगे, और उस देश के लोगों के दास हो जाएँगे; और वे उनको चार सौ वर्ष तक दुःख देंगे;

फिर जिस देश के वे दास होंगे उसको मैं दण्ड दूँगा: और उसके पश्चात् वे बड़ा धन वहाँ से लेकर निकल आएँगे। (निर्ग. 12:36)

तू तो अपने पितरों में कुशल के साथ मिल जाएगा; तुझे पूरे बुढ़ापे में मिट्टी दी जाएगी।

पर वे चौथी पीढ़ी में यहाँ फिर आएँगे: क्योंकि अब तक एमोरियों का अधर्म पूरा नहीं हुआ हैं।”

सूर्यास्त के समय अब्राम ढकी हुई भेंटों के पास भूमि पर सो रहा है; उसके ऊपर काले बादलों में एक दर्शन है: बड़ी इमारतों के सामने कठोर परिश्रम करते लोग, और फिर अपनी गठरियों और झुंडों के साथ निकलती एक जाति।

पद 17–21

धुआँ उठती अँगीठी और जलती मशाल

और ऐसा हुआ कि जब सूर्य अस्त हो गया और घोर अंधकार छा गया, तब एक अँगीठी जिसमें से धुआँ उठता था और एक जलती हुई मशाल दिखाई दी जो उन टुकड़ों के बीच में से होकर निकल गई।

उसी दिन यहोवा ने अब्राम के साथ यह वाचा बाँधी, “मिस्र के महानद से लेकर फरात नामक बड़े नद तक जितना देश है,

अर्थात्, केनियों, कनिज्जियों, कदमोनियों,

हित्तियों, परिज्जियों, रापाइयों,

एमोरियों, कनानियों, गिर्गाशियों और यबूसियों का देश, मैंने तेरे वंश को दिया है।”

रात को तारों के नीचे धुआँ उठती एक अँगीठी और जलती हुई मशाल ढकी हुई भेंटों की पंक्तियों के बीच से होकर निकलती हैं; अब्राम छाती पर हाथ रखे विस्मय से देखता है।