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उत्पत्ति 16
हागार और इश्माएल

सोलहवाँ अध्याय बताता है कि सन्तानहीन सारै अपनी मिस्री दासी हागार को अब्राम को देती है। गर्भवती होकर हागार अपनी स्वामिनी को तुच्छ समझने लगती है, फिर जंगल में भाग जाती है। वहाँ एक सोते के पास यहोवा का दूत उसे पाता है और इश्माएल के जन्म का समाचार देता है: हागार उस परमेश्वर को जानती है जो उसे देखता है।

पाठ: इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी, © 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0। शीर्षक, परिचय और चित्र: Imago Biblia।

पद 1–3

सारै हागार को अब्राम को देती है

अब्राम की पत्नी सारै के कोई सन्तान न थी: और उसके हागार नाम की एक मिस्री दासी थी। (गला. 4:22)

सारै ने अब्राम से कहा, “देख, यहोवा ने तो मेरी कोख बन्द कर रखी है इसलिए मैं तुझ से विनती करती हूँ कि तू मेरी दासी के पास जा; सम्भव है कि मेरा घर उसके द्वारा बस जाए।” सारै की यह बात अब्राम ने मान ली।

इसलिए जब अब्राम को कनान देश में रहते दस वर्ष बीत चुके तब उसकी स्त्री सारै ने अपनी मिस्री दासी हागार को लेकर अपने पति अब्राम को दिया, कि वह उसकी पत्नी हो।

तम्बू के सामने उदास सारै हाथ से युवा दासी हागार को, जिसकी आँखें झुकी हैं, चौकी पर बैठे अब्राम के सामने प्रस्तुत करती है।

पद 4 और 5

हागार का तिरस्कार

वह हागार के पास गया, और वह गर्भवती हुई; जब उसने जाना कि वह गर्भवती है, तब वह अपनी स्वामिनी को अपनी दृष्टि में तुच्छ समझने लगी।

तब सारै ने अब्राम से कहा, “जो मुझ पर उपद्रव हुआ वह तेरे ही सिर पर हो। मैंने तो अपनी दासी को तेरी पत्नी कर दिया; पर जब उसने जाना कि वह गर्भवती है, तब वह मुझे तुच्छ समझने लगी, इसलिए यहोवा मेरे और तेरे बीच में न्याय करे।”

आहत सारै अब्राम से तीखे स्वर में बात करती है, जो बेबस होकर हाथ उठाता है, जबकि गर्भवती हागार घमण्ड से मुँह फेर लेती है; दासियाँ देख रही हैं।

पद 6

हागार का भागना

अब्राम ने सारै से कहा, “देख तेरी दासी तेरे वश में है; जैसा तुझे भला लगे वैसा ही उसके साथ कर।” तब सारै उसको दुःख देने लगी और वह उसके सामने से भाग गई।

हागार कंधे पर मशक और थैला लिए पथरीली पगडंडी पर जल्दी-जल्दी छावनी से दूर जाती है और डर से पीछे मुड़कर देखती है; सारै तम्बुओं के सामने खड़ी है।

पद 7–14

वह परमेश्वर जो मुझे देखता है

तब यहोवा के दूत ने उसको जंगल में शूर के मार्ग पर जल के एक सोते के पास पाकर कहा,

“हे सारै की दासी हागार, तू कहाँ से आती और कहाँ को जाती है?” उसने कहा, “मैं अपनी स्वामिनी सारै के सामने से भाग आई हूँ।”

यहोवा के दूत ने उससे कहा, “अपनी स्वामिनी के पास लौट जा और उसके वश में रह।”

और यहोवा के दूत ने उससे कहा, “मैं तेरे वंश को बहुत बढ़ाऊँगा, यहाँ तक कि बहुतायत के कारण उसकी गिनती न हो सकेगी।”

और यहोवा के दूत ने उससे कहा, “देख तू गर्भवती है, और पुत्र जनेगी; तू उसका नाम इश्माएल रखना; क्योंकि यहोवा ने तेरे दुःख का हाल सुन लिया है।

और वह मनुष्य जंगली गदहे के समान होगा, उसका हाथ सब के विरुद्ध उठेगा, और सब के हाथ उसके विरुद्ध उठेंगे; और वह अपने सब भाई-बन्धुओं के मध्य में बसा रहेगा।”

तब उसने यहोवा का नाम जिसने उससे बातें की थीं, अत्ताएलरोई रखकर कहा, “क्या मैं यहाँ भी उसको जाते हुए देखने पाई और देखने के बाद भी जीवित रही?”

इस कारण उस कुएँ का नाम बएर-लहई-रोई कुआँ पड़ा; वह तो कादेश और बेरेद के बीच में है।

जंगल में खजूर के पेड़ों के नीचे एक सोते के पास घुटनों के बल बैठी हागार अपने ऊपर उतरते प्रकाश की ओर आँखें उठाती है।

पद 15 और 16

इश्माएल का जन्म

हागार को अब्राम के द्वारा एक पुत्र हुआ; और अब्राम ने अपने पुत्र का नाम, जिसे हागार ने जन्म दिया था, इश्माएल रखा।

जब हागार ने अब्राम के द्वारा इश्माएल को जन्म दिया उस समय अब्राम छियासी वर्ष का था।

तम्बू में अब्राम मुस्कुराती हागार के पास नवजात शिशु को गोद में लिए है; एक दासी कटोरा लाती है, और सारै द्वार से देख रही है।