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उत्पत्ति 3
पाप में पतन

तीसरा अध्याय बताता है कि सर्प कैसे स्त्री को परमेश्वर के वचन पर सन्देह कराता है, और पुरुष और स्त्री वर्जित फल खाते हैं। फिर लज्जा, भय, परिश्रम भरा जीवन और अन्त में अदन की वाटिका से निकाला जाना आता है।

पाठ: इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी, © 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0। शीर्षक, परिचय और चित्र: Imago Biblia।

पद 1–5

सर्प

यहोवा परमेश्वर ने जितने जंगली पशु बनाए थे, उन सब में सर्प धूर्त था, और उसने स्त्री से कहा, “क्या सच है, कि परमेश्वर ने कहा, ‘तुम इस वाटिका के किसी वृक्ष का फल न खाना’?” (प्रका. 12:9, प्रका. 20:2)

स्त्री ने सर्प से कहा, “इस वाटिका के वृक्षों के फल हम खा सकते हैं;

पर जो वृक्ष वाटिका के बीच में है, उसके फल के विषय में परमेश्वर ने कहा है कि न तो तुम उसको खाना और न ही उसको छूना, नहीं तो मर जाओगे।”

तब सर्प ने स्त्री से कहा, “तुम निश्चय न मरोगे

वरन् परमेश्वर आप जानता है कि जिस दिन तुम उसका फल खाओगे उसी दिन तुम्हारी आँखें खुल जाएँगी, और तुम भले बुरे का ज्ञान पाकर परमेश्वर के तुल्य हो जाओगे।”

सुनहरे फलों वाले वृक्ष के नीचे, डाली पर लिपटा एक बड़ा सर्प स्त्री से बात करता है जो फल की ओर हाथ बढ़ाती है; पुरुष देख रहा है।

पद 6 और 7

वर्जित फल

अतः जब स्त्री ने देखा कि उस वृक्ष का फल खाने में अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिये चाहने योग्य भी है, तब उसने उसमें से तोड़कर खाया; और अपने पति को भी दिया, जो उसके साथ था और उसने भी खाया। (1 तीमु. 2:14)

तब उन दोनों की आँखें खुल गईं, और उनको मालूम हुआ कि वे नंगे हैं; इसलिए उन्होंने अंजीर के पत्ते जोड़-जोड़कर लंगोट बना लिये।

स्त्री पुरुष को कुतरा हुआ सुनहरा फल देती है; दोनों अंजीर के पत्तों के लंगोट पहने हैं, सर्प देख रहा है।

पद 8–13

“तू कहाँ है?”

तब यहोवा परमेश्वर, जो दिन के ठंडे समय वाटिका में फिरता था, उसका शब्द उनको सुनाई दिया। तब आदम और उसकी पत्नी वाटिका के वृक्षों के बीच यहोवा परमेश्वर से छिप गए।

तब यहोवा परमेश्वर ने पुकारकर आदम से पूछा, “तू कहाँ है?”

उसने कहा, “मैं तेरा शब्द वाटिका में सुनकर डर गया, क्योंकि मैं नंगा था; इसलिए छिप गया।”

यहोवा परमेश्वर ने कहा, “किसने तुझे बताया कि तू नंगा है? जिस वृक्ष का फल खाने को मैंने तुझे मना किया था, क्या तूने उसका फल खाया है?”

आदम ने कहा, “जिस स्त्री को तूने मेरे संग रहने को दिया है उसी ने उस वृक्ष का फल मुझे दिया, और मैंने खाया।”

तब यहोवा परमेश्वर ने स्त्री से कहा, “तूने यह क्या किया है?” स्त्री ने कहा, “सर्प ने मुझे बहका दिया, तब मैंने खाया।” (रोम. 7:11, 2 कुरि. 11:3, 1 तीमु. 2:14)

साँझ के समय पुरुष और स्त्री डरकर वाटिका के वृक्षों के पीछे छिपते हैं, जबकि तनों के बीच से प्रकाश गुजरता है।

पद 14 और 15

सर्प को दण्ड

तब यहोवा परमेश्वर ने सर्प से कहा, “तूने जो यह किया है इसलिए तू सब घरेलू पशुओं, और सब जंगली पशुओं से अधिक श्रापित है; तू पेट के बल चला करेगा, और जीवन भर मिट्टी चाटता रहेगा;

और मैं तेरे और इस स्त्री के बीच में, और तेरे वंश और इसके वंश के बीच में बैर उत्पन्न करूँगा, वह तेरे सिर को कुचल डालेगा, और तू उसकी एड़ी को डसेगा।”

प्रतीकात्मक चित्र: एक मनुष्य का पैर धूल में रेंगते और डसने की कोशिश करते सर्प के सिर पर पड़ता है।

पद 16–19

परिश्रम और मिट्टी

फिर स्त्री से उसने कहा, “मैं तेरी पीड़ा और तेरे गर्भवती होने के दुःख को बहुत बढ़ाऊँगा; तू पीड़ित होकर बच्चे उत्पन्न करेगी; और तेरी लालसा तेरे पति की ओर होगी, और वह तुझ पर प्रभुता करेगा।” (1 कुरि. 11:3, इफि. 5:22, कुलु. 3:18)

और आदम से उसने कहा, “तूने जो अपनी पत्नी की बात सुनी, और जिस वृक्ष के फल के विषय मैंने तुझे आज्ञा दी थी कि तू उसे न खाना, उसको तूने खाया है, इसलिए भूमि तेरे कारण श्रापित है। तू उसकी उपज जीवन भर दुःख के साथ खाया करेगा; (इब्रा. 6:8)

और वह तेरे लिये काँटे और ऊँटकटारे उगाएगी, और तू खेत की उपज खाएगा;

और अपने माथे के पसीने की रोटी खाया करेगा, और अन्त में मिट्टी में मिल जाएगा; क्योंकि तू उसी में से निकाला गया है, तू मिट्टी तो है और मिट्टी ही में फिर मिल जाएगा।”

सूर्यास्त के समय पुरुष पत्थरों और कँटीली झाड़ियों से भरी भूमि को कठिनाई से जोतता है, जबकि थकी हुई स्त्री एक चट्टान पर बैठी है।

पद 20 और 21

चमड़े के अंगरखे

आदम ने अपनी पत्नी का नाम हव्वा रखा; क्योंकि जितने मनुष्य जीवित हैं उन सब की मूलमाता वही हुई।

और यहोवा परमेश्वर ने आदम और उसकी पत्नी के लिये चमड़े के वस्त्र बनाकर उनको पहना दिए।

चमड़े के अंगरखे पहने पुरुष और स्त्री साँझ की कोमल रोशनी में साथ-साथ खड़े हैं।

पद 22–24

वाटिका से निकाले गए

फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, “मनुष्य भले बुरे का ज्ञान पाकर हम में से एक के समान हो गया है: इसलिए अब ऐसा न हो, कि वह हाथ बढ़ाकर जीवन के वृक्ष का फल भी तोड़कर खा ले और सदा जीवित रहे।” (प्रका. 2:7, प्रका. 22:2,14,19, उत्प. 3:24, प्रका. 2:7)

इसलिए यहोवा परमेश्वर ने उसको अदन की वाटिका में से निकाल दिया कि वह उस भूमि पर खेती करे जिसमें से वह बनाया गया था।

इसलिए आदम को उसने निकाल दिया और जीवन के वृक्ष के मार्ग का पहरा देने के लिये अदन की वाटिका के पूर्व की ओर करूबों को, और चारों ओर घूमनेवाली अग्निमय तलवार को भी नियुक्त कर दिया।

पुरुष और स्त्री पीछे से दिखते हुए वाटिका से दूर जाते हैं, जबकि दो चमकते करूब और जलती तलवार द्वार की रक्षा करते हैं।