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उत्पत्ति 2
अदन की वाटिका

दूसरा अध्याय सातवें दिन परमेश्वर के विश्राम से शुरू होता है, फिर सृष्टि को और निकट से बताता है। यहोवा परमेश्वर मनुष्य को मिट्टी से रचता है, अदन में वाटिका लगाता है और स्त्री को बनाता है, ताकि मनुष्य अकेला न रहे।

पाठ: इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी, © 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0। शीर्षक, परिचय और चित्र: Imago Biblia।

पद 1–3

परमेश्वर का विश्राम

इस तरह आकाश और पृथ्वी और उनकी सारी सेना का बनाना समाप्त हो गया।

और परमेश्वर ने अपना काम जिसे वह करता था सातवें दिन समाप्त किया, और उसने अपने किए हुए सारे काम से सातवें दिन विश्राम किया। (इब्रा. 4:4)

और परमेश्वर ने सातवें दिन को आशीष दी और पवित्र ठहराया; क्योंकि उसमें उसने सृष्टि की रचना के अपने सारे काम से विश्राम लिया।

भोर का शान्त दृश्य: भेड़ों के पास लेटा एक सिंह, नदी किनारे आराम करती बकरियाँ और चिकारे।

पद 4–7

मिट्टी से रचा गया मनुष्य

आकाश और पृथ्वी की उत्पत्ति का वृत्तान्त यह है कि जब वे उत्पन्न हुए अर्थात् जिस दिन यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी और आकाश को बनाया।

तब मैदान का कोई पौधा भूमि पर न था, और न मैदान का कोई छोटा पेड़ उगा था, क्योंकि यहोवा परमेश्वर ने पृथ्वी पर जल नहीं बरसाया था, और भूमि पर खेती करने के लिये मनुष्य भी नहीं था।

लेकिन कुहरा पृथ्वी से उठता था जिससे सारी भूमि सिंच जाती थी।

तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को भूमि की मिट्टी से रचा, और उसके नथनों में जीवन का श्वास फूँक दिया; और आदम जीवित प्राणी बन गया। (1 कुरि. 15:45)

लाल, नंगी भूमि पर धुंध में लेटा एक पुरुष, जिस पर आकाश से प्रकाश की किरण उतरती है।

पद 8 और 9

अदन में वाटिका

और यहोवा परमेश्वर ने पूर्व की ओर, अदन में एक वाटिका लगाई; और वहाँ आदम को जिसे उसने रचा था, रख दिया।

और यहोवा परमेश्वर ने भूमि से सब भाँति के वृक्ष, जो देखने में मनोहर और जिनके फल खाने में अच्छे हैं, उगाए, और वाटिका के बीच में जीवन के वृक्ष को और भले या बुरे के ज्ञान के वृक्ष को भी लगाया। (प्रका. 2:7, प्रका. 22:14)

एक हरी-भरी वाटिका जिसमें से नदी बहती है, और बीच में दो बड़े वृक्ष: एक चमकता हुआ, दूसरा सुनहरे फलों वाला।

पद 10–14

चार नदियाँ

उस वाटिका को सींचने के लिये एक महानदी अदन से निकली और वहाँ से आगे बहकर चार नदियों में बँट गई। (प्रका. 22:2)

पहली नदी का नाम पीशोन है, यह वही है जो हवीला नाम के सारे देश को जहाँ सोना मिलता है घेरे हुए है।

उस देश का सोना उत्तम होता है; वहाँ मोती और सुलैमानी पत्थर भी मिलते हैं।

और दूसरी नदी का नाम गीहोन है; यह वही है जो कूश के सारे देश को घेरे हुए है।

और तीसरी नदी का नाम हिद्देकेल है; यह वही है जो अश्शूर के पूर्व की ओर बहती है। और चौथी नदी का नाम फरात है।

निकट पूर्व का चित्रित नक्शा: बीच की वाटिका से एक नदी निकलकर चार धाराओं में बँटती है जो समुद्रों की ओर बहती हैं। अदन से निकलती नदी पीशोन गीहोन हिद्देकेल (टिगरिस) फरात

पद 15–17

वाटिका में काम करना और उसकी रक्षा करना

तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को लेकर अदन की वाटिका में रख दिया, कि वह उसमें काम करे और उसकी रखवाली करे।

और यहोवा परमेश्वर ने आदम को यह आज्ञा दी, “तू वाटिका के किसी भी वृक्षों का फल खा सकता है;

पर भले या बुरे के ज्ञान का जो वृक्ष है, उसका फल तू कभी न खाना: क्योंकि जिस दिन तू उसका फल खाएगा उसी दिन अवश्य मर जाएगा।”

मनुष्य एक सोते के पास अंजीर के पेड़ की छँटाई करता है; दूर सुनहरे फलों वाला वृक्ष खड़ा है।

पद 18–20

पशुओं के नाम

फिर यहोवा परमेश्वर ने कहा, “आदम का अकेला रहना अच्छा नहीं; मैं उसके लिये एक ऐसा सहायक बनाऊँगा जो उसके लिये उपयुक्त होगा।” (1 कुरि. 11:9)

और यहोवा परमेश्वर भूमि में से सब जाति के जंगली पशुओं, और आकाश के सब भाँति के पक्षियों को रचकर आदम के पास ले आया कि देखे, कि वह उनका क्या-क्या नाम रखता है; और जिस-जिस जीवित प्राणी का जो-जो नाम आदम ने रखा वही उसका नाम हो गया।

अतः आदम ने सब जाति के घरेलू पशुओं, और आकाश के पक्षियों, और सब जाति के जंगली पशुओं के नाम रखे; परन्तु आदम के लिये कोई ऐसा सहायक न मिला जो उससे मेल खा सके।

एक चट्टान पर खड़ा मनुष्य हाथ उठाता है, जबकि सिंह, बैल, भेड़ें, घोड़े, एक भालू, चिकारे और पक्षी उसके सामने से गुजरते हैं।

पद 21–25

स्त्री

तब यहोवा परमेश्वर ने आदम को गहरी नींद में डाल दिया, और जब वह सो गया तब उसने उसकी एक पसली निकालकर उसकी जगह माँस भर दिया। (1 कुरि. 11:8)

और यहोवा परमेश्वर ने उस पसली को जो उसने आदम में से निकाली थी, स्त्री बना दिया; और उसको आदम के पास ले आया। (1 तीमु. 2:13)

तब आदम ने कहा, “अब यह मेरी हड्डियों में की हड्डी और मेरे माँस में का माँस है; इसलिए इसका नाम नारी होगा, क्योंकि यह नर में से निकाली गई है।”

इस कारण पुरुष अपने माता-पिता को छोड़कर अपनी पत्नी से मिला रहेगा और वे एक ही तन बने रहेंगे। (मत्ती 19:5, मर. 10:7,8, इफि. 5:31)

आदम और उसकी पत्नी दोनों नंगे थे, पर वे लज्जित न थे।

वाटिका के एक वृक्ष के नीचे जागकर पुरुष स्त्री को अपने सामने खड़ा देखता है; दोनों आनन्द से एक-दूसरे को देखते हैं।