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उत्पत्ति 11
बाबेल की मीनार

ग्यारहवाँ अध्याय बाबेल की मीनार की कथा कहता है: एक ही भाषा बोलने वाले लोग आकाश तक पहुँचने वाली मीनार बनाकर अपना नाम करना चाहते हैं, परन्तु यहोवा उनकी भाषा में गड़बड़ी डालकर उन्हें तितर-बितर कर देता है। फिर शेम की वंशावली तेरह तक ले जाती है, जो अपने पुत्र अब्राम के साथ ऊर से निकलता है।

पाठ: इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी, © 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0। शीर्षक, परिचय और चित्र: Imago Biblia।

पद 1–4

“आओ, हम एक नगर और एक मीनार बना लें”

सारी पृथ्वी पर एक ही भाषा, और एक ही बोली थी।

उस समय लोग पूर्व की ओर चलते-चलते शिनार देश में एक मैदान पाकर उसमें बस गए।

तब वे आपस में कहने लगे, “आओ, हम ईंटें बना-बनाकर भली भाँति आग में पकाएँ।” और उन्होंने पत्थर के स्थान पर ईंट से, और मिट्टी के गारे के स्थान में चूने से काम लिया।

फिर उन्होंने कहा, “आओ, हम एक नगर और एक मीनार बना लें, जिसकी चोटी आकाश से बातें करे, इस प्रकार से हम अपना नाम करें, ऐसा न हो कि हमको सारी पृथ्वी पर फैलना पड़े।”

मैदान में मज़दूर ईंटें ढालते और पकाते हैं और चूना-मसाला ढोते हैं, मचानों से घिरी एक विशाल सीढ़ीदार मीनार के चारों ओर।

पद 5–9

भाषाओं की गड़बड़ी

जब लोग नगर और गुम्मट बनाने लगे; तब उन्हें देखने के लिये यहोवा उतर आया।

और यहोवा ने कहा, “मैं क्या देखता हूँ, कि सब एक ही दल के हैं और भाषा भी उन सब की एक ही है, और उन्होंने ऐसा ही काम भी आरम्भ किया; और अब जो कुछ वे करने का यत्न करेंगे, उसमें से कुछ भी उनके लिये अनहोना न होगा।

इसलिए आओ, हम उतरकर उनकी भाषा में बड़ी गड़बड़ी डालें, कि वे एक दूसरे की बोली को न समझ सकें।”

इस प्रकार यहोवा ने उनको वहाँ से सारी पृथ्वी के ऊपर फैला दिया; और उन्होंने उस नगर का बनाना छोड़ दिया।

इस कारण उस नगर का नाम बाबेल पड़ा; क्योंकि सारी पृथ्वी की भाषा में जो गड़बड़ी है, वह यहोवा ने वहीं डाली, और वहीं से यहोवा ने मनुष्यों को सारी पृथ्वी के ऊपर फैला दिया।

एक अजीब हवा के नीचे मज़दूर एक-दूसरे को नहीं समझते: वे हाथ हिलाते हैं, औज़ार छोड़ देते हैं, और परिवार हर दिशा में नगर छोड़ते हैं।

पद 10–26

शेम से अब्राम तक

शेम की वंशावली यह है। जल-प्रलय के दो वर्ष पश्चात् जब शेम एक सौ वर्ष का हुआ, तब उसने अर्पक्षद को जन्म दिया।

और अर्पक्षद के जन्म के पश्चात् शेम पाँच सौ वर्ष जीवित रहा; और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।

जब अर्पक्षद पैंतीस वर्ष का हुआ, तब उसने शेलह को जन्म दिया।

और शेलह के जन्म के पश्चात् अर्पक्षद चार सौ तीन वर्ष और जीवित रहा, और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।

जब शेलह तीस वर्ष का हुआ, तब उसके द्वारा एबेर का जन्म हुआ।

और एबेर के जन्म के पश्चात् शेलह चार सौ तीन वर्ष और जीवित रहा, और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।

जब एबेर चौंतीस वर्ष का हुआ, तब उसके द्वारा पेलेग का जन्म हुआ।

और पेलेग के जन्म के पश्चात् एबेर चार सौ तीस वर्ष और जीवित रहा, और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।

जब पेलेग तीस वर्ष का हुआ, तब उसके द्वारा रू का जन्म हुआ।

और रू के जन्म के पश्चात् पेलेग दो सौ नौ वर्ष और जीवित रहा, और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।

जब रू बत्तीस वर्ष का हुआ, तब उसके द्वारा सरूग का जन्म हुआ।

और सरूग के जन्म के पश्चात् रू दो सौ सात वर्ष और जीवित रहा, और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।

जब सरूग तीस वर्ष का हुआ, तब उसके द्वारा नाहोर का जन्म हुआ।

और नाहोर के जन्म के पश्चात् सरूग दो सौ वर्ष और जीवित रहा, और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।

जब नाहोर उनतीस वर्ष का हुआ, तब उसके द्वारा तेरह का जन्म हुआ;

और तेरह के जन्म के पश्चात् नाहोर एक सौ उन्नीस वर्ष और जीवित रहा, और उसके और भी बेटे-बेटियाँ उत्पन्न हुईं।

जब तक तेरह सत्तर वर्ष का हुआ, तब तक उसके द्वारा अब्राम, और नाहोर, और हारान उत्पन्न हुए।

चित्रित वंश-वृक्ष: जैतून की एक डाली शेम से तेरह तक नौ गोल चित्रों को जोड़ती है, फिर उसके पुत्रों के लिए तीन छोटे चित्रों में बँटती है।
  1. शेम · 600 वर्ष
  2. अर्पक्षद · 438 वर्ष
  3. शेलह · 433 वर्ष
  4. एबेर · 464 वर्ष
  5. पेलेग · 239 वर्ष
  6. रू · 239 वर्ष
  7. सरूग · 230 वर्ष
  8. नाहोर · 148 वर्ष
  9. तेरह · 205 वर्ष
  10. अब्राम
  11. नाहोर
  12. हारान

पद 27–32

कसदियों के ऊर से प्रस्थान

तेरह की वंशावली यह है: तेरह ने अब्राम, और नाहोर, और हारान को जन्म दिया; और हारान ने लूत को जन्म दिया।

और हारान अपने पिता के सामने ही, कसदियों के ऊर नाम नगर में, जो उसकी जन्म-भूमि थी, मर गया।

अब्राम और नाहोर दोनों ने विवाह किया। अब्राम की पत्नी का नाम सारै, और नाहोर की पत्नी का नाम मिल्का था। यह उस हारान की बेटी थी, जो मिल्का और यिस्का दोनों का पिता था।

सारै तो बाँझ थी; उसके सन्तान न हुई।

और तेरह अपने पुत्र अब्राम, और अपने पोते लूत, जो हारान का पुत्र था, और अपनी बहू सारै, जो उसके पुत्र अब्राम की पत्नी थी, इन सभी को लेकर कसदियों के ऊर नगर से निकल कनान देश जाने को चला; पर हारान नामक देश में पहुँचकर वहीं रहने लगा।

जब तेरह दो सौ पाँच वर्ष का हुआ, तब वह हारान देश में मर गया।

सुबह ऊर की दीवारों और उसकी बड़ी सीढ़ीदार मीनार के सामने तेरह का कारवाँ अब्राम, सारै, लूत, सेवकों और झुण्डों के साथ निकलता है।