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उत्पत्ति 9
वाचा का धनुष

नौवाँ अध्याय एक नई शुरुआत खोलता है: परमेश्वर नूह और उसके पुत्रों को आशीष देता है और उनसे और हर जीवित प्राणी से वाचा बाँधता है, जिसका चिन्ह बादल में धनुष है: फिर कभी जल-प्रलय नहीं होगा। फिर अध्याय नूह की दाख की बारी और अपने पुत्रों से उसके अन्तिम वचनों की कथा कहता है।

पाठ: इंडियन रिवाइज्ड वर्जन (IRV) हिंदी, © 2019 Bridge Connectivity Solutions, CC BY-SA 4.0। शीर्षक, परिचय और चित्र: Imago Biblia।

पद 1–7

“फूलो-फलो और बढ़ो”

फिर परमेश्वर ने नूह और उसके पुत्रों को आशीष दी और उनसे कहा, “फूलो-फलो और बढ़ो और पृथ्वी में भर जाओ।

तुम्हारा डर और भय पृथ्वी के सब पशुओं, और आकाश के सब पक्षियों, और भूमि पर के सब रेंगनेवाले जन्तुओं, और समुद्र की सब मछलियों पर बना रहेगा वे सब तुम्हारे वश में कर दिए जाते हैं।

सब चलनेवाले जन्तु तुम्हारा आहार होंगे; जैसे तुम को हरे-हरे छोटे पेड़ दिए थे, वैसे ही तुम्हें सब कुछ देता हूँ। (उत्प. 1:29,30)

पर माँस को प्राण समेत अर्थात् लहू समेत तुम न खाना। (व्यव. 12:23)

और निश्चय मैं तुम्हारा लहू अर्थात् प्राण का बदला लूँगा: सब पशुओं, और मनुष्यों, दोनों से मैं उसे लूँगा; मनुष्य के प्राण का बदला मैं एक-एक के भाई-बन्धु से लूँगा।

जो कोई मनुष्य का लहू बहाएगा उसका लहू मनुष्य ही से बहाया जाएगा क्योंकि परमेश्वर ने मनुष्य को अपने ही स्वरूप के अनुसार बनाया है। (लैव्य. 24:17)

और तुम तो फूलो-फलो और बढ़ो और पृथ्वी पर बहुतायत से सन्तान उत्पन्न करके उसमें भर जाओ।”

पहाड़ की ढलान पर नूह अपने परिवार को आशीष देने के लिए आकाश की ओर हाथ उठाता है, चारों ओर रोटी और फल; पीछे खाली जहाज है और पशु दूरी पर हैं।

पद 8–17

बादल में धनुष

फिर परमेश्वर ने नूह और उसके पुत्रों से कहा,

“सुनो, मैं तुम्हारे साथ और तुम्हारे पश्चात् जो तुम्हारा वंश होगा, उसके साथ भी वाचा बाँधता हूँ;

और सब जीवित प्राणियों से भी जो तुम्हारे संग हैं, क्या पक्षी क्या घरेलू पशु, क्या पृथ्वी के सब जंगली पशु, पृथ्वी के जितने जीवजन्तु जहाज से निकले हैं।

और मैं तुम्हारे साथ अपनी यह वाचा बाँधता हूँ कि सब प्राणी फिर जल-प्रलय से नाश न होंगे और पृथ्वी का नाश करने के लिये फिर जल-प्रलय न होगा।”

फिर परमेश्वर ने कहा, “जो वाचा मैं तुम्हारे साथ, और जितने जीवित प्राणी तुम्हारे संग हैं उन सब के साथ भी युग-युग की पीढ़ियों के लिये बाँधता हूँ; उसका यह चिन्ह है:

कि मैंने बादल में अपना धनुष रखा है, वह मेरे और पृथ्वी के बीच में वाचा का चिन्ह होगा।

और जब मैं पृथ्वी पर बादल फैलाऊं तब बादल में धनुष दिखाई देगा।

तब मेरी जो वाचा तुम्हारे और सब जीवित शरीरधारी प्राणियों के साथ बंधी है; उसको मैं स्मरण करूँगा, तब ऐसा जल-प्रलय फिर न होगा जिससे सब प्राणियों का विनाश हो।

बादल में जो धनुष होगा मैं उसे देखकर यह सदा की वाचा स्मरण करूँगा, जो परमेश्वर के और पृथ्वी पर के सब जीवित शरीरधारी प्राणियों के बीच बंधी है।”

फिर परमेश्वर ने नूह से कहा, “जो वाचा मैंने पृथ्वी भर के सब प्राणियों के साथ बाँधी है, उसका चिन्ह यही है।”

पहाड़ी पर पीछे से दिखता नूह का परिवार एक हरी घाटी के ऊपर बड़े इन्द्रधनुष को देखता है, जहाँ पशु चरते हैं; जहाज दूर टिका है।

पद 18 और 19

तीन पुत्र पृथ्वी को भरते हैं

नूह के जो पुत्र जहाज में से निकले, वे शेम, हाम और येपेत थे; और हाम कनान का पिता हुआ।

नूह के तीन पुत्र ये ही हैं, और इनका वंश सारी पृथ्वी पर फैल गया।

भोर में नूह और उसकी पत्नी अपने तीन पुत्रों को विदा करते हैं, जो अपने परिवारों, गधों और भेड़ों के साथ पहाड़ों, मैदानों और समुद्र की ओर निकलते हैं।

पद 20–23

दाख की बारी और कपड़ा

नूह किसानी करने लगा: और उसने दाख की बारी लगाई।

और वह दाखमधु पीकर मतवाला हुआ; और अपने तम्बू के भीतर नंगा हो गया।

तब कनान के पिता हाम ने, अपने पिता को नंगा देखा, और बाहर आकर अपने दोनों भाइयों को बता दिया।

तब शेम और येपेत दोनों ने कपड़ा लेकर अपने कंधों पर रखा और पीछे की ओर उलटा चलकर अपने पिता के नंगे तन को ढाँप दिया और वे अपना मुख पीछे किए हुए थे इसलिए उन्होंने अपने पिता को नंगा न देखा।

साँझ को एक दाख की बारी में दो भाई कन्धों पर कपड़ा लिए और मुँह फेरे हुए उल्टे पाँव एक तम्बू की ओर चलते हैं, जबकि तीसरा हाथ बाँधे अलग खड़ा है।

पद 24–29

नूह के अन्तिम वचन

जब नूह का नशा उतर गया, तब उसने जान लिया कि उसके छोटे पुत्र ने उसके साथ क्या किया है।

इसलिए उसने कहा, “कनान श्रापित हो: वह अपने भाई-बन्धुओं के दासों का दास हो।”

फिर उसने कहा, “शेम का परमेश्वर यहोवा धन्य है, और कनान शेम का दास हो।

परमेश्वर येपेत के वंश को फैलाए; और वह शेम के तम्बुओं में बसे, और कनान उसका दास हो।”

जल-प्रलय के पश्चात् नूह साढ़े तीन सौ वर्ष जीवित रहा।

इस प्रकार नूह की कुल आयु साढ़े नौ सौ वर्ष की हुई; तत्पश्चात् वह मर गया।

तेल के दीये से प्रकाशित तम्बू में वृद्ध नूह हाथ उठाकर गम्भीरता से बोलता है; उसके दो पुत्र सिर झुकाए सुनते हैं, तीसरा अलग खड़ा है।